खोज करे
  • JustInfo

कहानी एक वीर योद्धा की, जो शहीद होने के बाद भी करता है ड्यूटी!!!

भारत में हमेशा से भारतीय सेना को एक उच्च दर्जा दिया गया है, और सभी भारतीय, सेना के सभी जवानों की बहुत इज्जत करते है. यह कहानी भी भारतीय सेना के एक ऐसे योद्धा की है, जिनका नाम है कप्तान हरभजन सिंह!


Baba Harbhajan Singh

हरभजन सिंहजी का जन्म ३० अगस्त १९४६ को पंजाब, पाकिस्तान में हुआ था. पार्टीशन के बाद भारत आकर उन्होंने अपनी पढ़ाई गांव की पाठशाला से पूरी की और एक सैनिक की तौर पर अमृतसर में पंजाब रेजिमेंट में शामिल हुए. ३० जून १९६५ में उनको १४ राजपूत रेजिमेंट में शामिल किया गया. उनके साथ मिलकर हरभजनजीने भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया था.

बाद में उनकी पोस्टिंग सिक्किम में नथु ला पास नाम की जगह पर हुई. ४ अक्तूबर १९६८ में नाथु ला पास के पास १४५०० फुट की ऊंचाई से गिरकर उनकी मृत्यु हो गई. ३ दिनों तक हर जगह ढूंढने के बाद भी उनका शव सेना के जवानो को नहीं मिला. लेकिन उसी दिन रात को उनक करीबी सहयोगी के सपने में आकर हरभजन सिंहजी ने बताया की उनका शव कहा है. अगले दिन सेना के जवानो ने उसी जगह से उनका शव रायफल के साथ बरामद किया. मृत्यु के समय उनकी उम्र केवल २२ साल थी.

बहुत सारे भारतीय सैनिको का मानना है की मृत्यु के बाद भी उनकी आत्मा भारत-चीन बॉर्डर पर पहरा देती है. उनका कहना है की भारत-चीन युद्ध में भी हरभजन सिंह जीने बहुत मदद की थी. शत्रु सेना के सारी जानकारी हरभान जी पेहले ही भारतीय जवानो को सपने में आकर बताते थे. और अगर कोई सैनिक रात्रि की गश्त लगते समय सो गया तो किसीने उनको जोरदार थप्पड़ मारा हो ऐसा अनुभव होता है.


धीरे धीरे सब लोग हरभजन जी को बाबाजी के नाम से जानने लगे. भारतीय सेना ने उनकी याद में सिक्किम में उनके नाम का मंदिर बनाया हे. वहा उनकी सभी चीजे याद की तौर पर राखी है. सभी उस जगह पर उनका दर्शन लेने और राष्ट्रगान गाने इकठ्ठा होते है.

भारतीय सेना आज भी उनकी सैलेरी उनके घरवालों को भेजते है. हर साल उनकी २ महीने के लिए छुट्टी सैंक्शन होती है, और उनके नाम की ट्रैन की बुकिंग भी की जाती है, और उस वक्त सेना के दो जवान उनका सामान ट्रेन से उनके गांव तक पहुंचाते है. छुट्टी खत्म होते ही उनक सामान वापिस उनके बंकर में पहुंचाया जाता था.



इतना ही नहीं बल्कि जब भी बॉर्डर पर चीन और भारत के बीच में कोई समझौता और करार होता है तो चीनी सेना भी "बाबाजी" के लिए एक खुर्सी खाली रखती है.

२६ जनवरी १९६९ में भारतीय सरकारने उनके बहादुरी लिए उनको “परम वीर चक्र” से सम्मानित किया.


यह हे भारतीय सेना की असली ताकत है जो हमारे देश की दुनिया में एक महान देश के तौर पर प्रदर्शित करता है.

सलाम! ऐसे सैनिको को जो अपनी जान दे कर हमरी जान की रक्षा करते है.

जय जवान! जय किसान!



#BabaHarbhajanSingh #Babaji #Soldier #OnDuty #IndianArmy #India #Respectforsoldiers


©2019 by JustInfo.